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Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

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Vijay Kumar parashar "साखी"

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करवाचौथ मनाऊं कैसे

करवाचौथ मनाऊं कैसे

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करवाचौथ में मनाऊं कैसे

सीमा छोड़कर घर आऊं कैसे


मां की हिफाज़त करनी है मुझे,

तिरंगे को भूल जाऊँ कैसे


सजनी की आई है खबर घर से

आप करना माँ की रक्षा बेहिचक से


हाड़ी रानी की बेटी हूं,

शीश देकर ही मनाऊंगी,


तिरंगे को ही चाँद बनाऊंगी

सबके चाँद की रक्षा करना,


करवाचौथ मना लूँगी,

मैं तो तिरंगे में आपको देख के।


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