क्रुल वर्ल्ड
क्रुल वर्ल्ड
कुछ पाने की चाहत पंछी बन आगाज भरता है,
तो वहीं हकीकत जमी पर ला पटकती है।
ये कम्बख्त दुनियाँ बड़ी जालिम है,
किसी को कामयाबी तक आसानी से कहाँ पहुंचने देती है?
गिरते को कौन उठाता है,
यहाँ तो संभलते हुए को धकेल दिया जाता है।
जुबां पर चासनी लिए,
पीठ पर खंजर घोप दिया जाता है।
काबिल को पीछे खींचना,
जैसे यहाँ का तो रिवाज है।
दूसरों को कहाँ हौसला दिया जाता है,
यहाँ तो दूसरों कुचल कर ही राह बनाया जाता है।
