tikta memories
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कुछ खट्टी ,मीठी तो कुछ कड़वी सी यादे है।
माँ के नुस्खों के भी किस्से निराले है।
सर्दी लगी तो काढ़ा, और गर्म शरीर को दो कुछ पतली घोल वाला करेले का पन्ना।
अक्सर हमे हो जाया करता था बुखार,
तो पीनी पड़ती भुईनीम जैसी कड़वी पत्ती का रस।
जिसका नाम सुनते ही हो जाते थे हम चंग्गे।
नहीं तो पिला कर ही साँस लिया करती थी हमारी मम्मी।
पापा का बढ़ा हुआ था शुगर।
तब रोज उन्हें करना पड़ता है करेले काे ग्रहण ।
हम देख कर उनकी सकल उन्हें चिढ़ाया करते हैं।
और वो करेले ना खाने का रोज बहाना बनाते हैं।
