Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Arunima Bahadur

Inspirational


4  

Arunima Bahadur

Inspirational


कर्तव्य की पुकार

कर्तव्य की पुकार

1 min 153 1 min 153

आज लेखनी ने पूछा

क्यो इतना मौन हो तुम

कहा खोई शब्दो की माला

क्यो इतना उदास हो तुम

कौन सी पीड़ा तुम्हे सताए

जरा मुझे भी बता दो तुम


तेरे भाव मै पिरोकर

सजाती हूँ कोरे कागज पर

पर न खामोश रहना यूँ

काज तुझे कुछ अधिक है करना

बन ममत्व की मिसाल

 पीड़ा जन जन की हरना

सुन कर मैं लेखनी की वाणी


बोली मैं सच कही तूने कहानी

यही तो पीड़ा सता रही हैं

दुःख मानवता का देख

हर पल मुझे रुला रही हैं


मैं मौन थी इस चिंतन में

कि क्या पहुँचूंगी जन जन के मन में,

बना पाऊँगी पुनः सुंदर जहाँ

सजा दूंगी हर अंतःकरण यहाँ

मैंने सोचा मैं हूं अकेली


पर जब तू साथ है

तो जहाँ जीत सकती हूँ

हर होठो पर मुस्कान सजा सकती हूं

बदल सकती हूं जहाँ


त्याग, तप, प्रेम के पुष्प जहाँ

एक कदम उठाओ 

तब राह बनती हैं

मुस्कान तब हर मुख पर सजती हैं।


हाँ जीत सकती हूं

जहां, जब तेरा साथ है

ये मेरा विश्वास है,

ये मेरा विश्वास है।।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Arunima Bahadur

Similar hindi poem from Inspirational