STORYMIRROR

मिली साहा

Abstract

4  

मिली साहा

Abstract

कृष्णा

कृष्णा

1 min
332

देवकी ने जन्म दिया यशोदा ने है पाला

मथुरा के कारागार में जन्मा है नंदलाला


वासुदेव है जनक पिता नंद है पालनहारा

सृष्टि का उद्धार करने आया है तारणहारा


नंद और यशोदा की आंखों का वो तारा

वृंदावन में पला कान्हा सबका है दुलारा


माथे पर कान्हा के मोर मुकुट है सुहाया

माखन-मिश्री कान्हा को बहुत ही भाया


अद्भुत छवि कान्हा की श्याम वर्ण है काया

मोह ले सबका मन मनमोहन वो कहलाया


मुरली की धुन पे गोपियों को है रिझाया

मोहित हो गई गोपियां मुरलीधर है आया


गोकुल में सखाओं संग गैया है खूब चराया

ग्वालों संग खेले कन्हैया गोविंदा कहलाया


राधा के प्रियतम है कान्हा रास खूब रचाया

तोड़ मटकी गोपियों की उनको बड़ा सताया


श्राप के कारण राधा से विवाह नहीं हो पाया

कृष्णा ने राधा को अनंत प्रेम का पाठ पढ़ाया


अंत करके कंस का मथुरा को मुक्त करवाया

माता-पिता को करा आजाद गले से लगाया


सखा सुदामा के साथ मित्रता खूब निभाया

बनाकर द्वारका नगरी द्वारकाधीश कहलाया


रणभूमि में जरासंध को भ्रमित करवाया

रणछोड़ कर भागा वह रणछोड़ कहलाया


द्वारका नगरी में रुकमणी संग विवाह रचाया

राधा संग अपने अनंत प्रेम को भी है निभाया


सारथी बनकर अर्जुन को है मार्ग दिखाया

गीता के उपदेश से विश्व को ज्ञान सिखाया


जिसने दुनिया को प्रेम का पाठ सिखलाया

वो हम सबका प्यारा लड्डू गोपाल कहलाया


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract