STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational Thriller

4  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Inspirational Thriller

कर्मो का प्रायश्चित

कर्मो का प्रायश्चित

1 min
5

ज़िंदगी की इस राह पर,

बहोत बदलाव देख चुका हूं,

सबको ताकत से वश करके,

अब खूद को ढुंढने निकला हूं।


दुनिया में अपना रोफ जमाकर,

बहुत झूल्म सितम कर बैठा हूं,

बहोत गुनाहखोरी की है मैने,

अब ईन्सान बनने निकला हूं।


मोह माया का दिवाना होकर,

बहोत पायमाल हो चूका हूं,

अपने कर्मो की सज़ा भूगतकर,

अब निर्मल बनने निकला हूं।


भूला भटका मुसाफिर बनकर,

बहोत गमगीनीमें डूब चूका हूं,

अब श्याम शरणमें जा कर "मुरली",

भवसागर पार करने निकला हूं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational