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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

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Chandresh Kumar Chhatlani

Inspirational

क्रांति-शब्द

क्रांति-शब्द

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किसी भूली हुई लाइब्रेरी के,

शांत कोने में रखी,

धूल-धूसरित किताब

वैसे तो यूँ ही पड़ी रहती है।


बादलों तले की धरती हो,

या हो आँखें दिखाता सूरज,

कुछ किताबों की ओर

नज़र भर देखता भी नहीं कोई।


पर कागज़ों के ढेर की पेकिंग वह,

समय के गर्त में दबी

कोई जलती हुई चिंगारी भी हो सकती है।


पता तो तब चले,

जब कोई उसे छुए-उसे खोले,

हर पन्ने पलटने पर,

उठी हुई विचारों की लपटें,

और जलते हुए ऐतिहासिक शब्दों की

आज की आवाज़।


अक्षर-अक्षर, ज्वलनशील

पंक्ति-पंक्ति छिपी क्रांति,

काश! वे पढ़े जाएं,

तो बदल सकती है -

किसी की सोच,

किसी का जीवन,

या शायद पूरा युग भी।


तुम किसी किताबों को

धूल से मत ढँकने दो।

चाहे नई हो या पुरातन,

उन्हें पढ़ो,

उन्हें समझो,

क्योंकि एक भूली हुई किताब में भी

एक नई दुनिया उग रही होती है।


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