क्रांति की ज्वाला
क्रांति की ज्वाला
क्रांति की ज्वाला को उसने,
हर दिल में धधकाई जैसे।
भारत भू सदा ऋणी रहेगा,
आजादी की लौ जलाई जिसने।
आजादी की कीमत में उसने,
था खून बहाया पानी जैसे।
भारत माॅं का सच्चा सिपाही,
क्रांति की मशाल जलाई जिसने।
तन-मन धन अर्पण कर उसने,
था खुद को झोंक दिया जैसे।
मां भारती का सच्चा सपूत,
अमर गाथा लिख दिया जिसने।
भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव ने
हॅंसते-हॅंसते फांसी को चूमा था।
अपने प्राणों की आहूति देकर,
जवानी देश के नाम किया उसने।
'जय हिन्द' का नारा देकर उसने,
'दिल्ली चलो' साथ बुलाया जैसे।
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा"
ये कहकर आजादी की लौ जलाई जिसने।
