STORYMIRROR

संदीप सिंधवाल

Abstract

4  

संदीप सिंधवाल

Abstract

कोविड१९ - ये समय है साहब

कोविड१९ - ये समय है साहब

1 min
612

तब वो सामाजिकता से 

दूर रहते थे

जानबूझकर

और आज समाज से 

दूर रहना पड़ रहा है। 


वो कहते थे 

समय किसके पास है? 

व्यस्त थे कमाने में 

जीने के लिए, 

आज उनके पास 

समय बहुत है कटता नहीं

जीने के लिए 

कमाना छोड़ दिया। 


तब बहाने बहुत थे

दूरी रखने को 

आज पास आ नहीं सकते

बहाने तो खत्म हैं। 

ये समय है साहब 

कोविड १९ से दिखा गया

जीवन की सच्चाई। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract