STORYMIRROR

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

4  

Vijay Kumar parashar "साखी"

Abstract

कोरोना-कर्मवीर

कोरोना-कर्मवीर

1 min
303

नहीं किसी बला से वो डरा डरते हैं

काम अपना वो बेख़ौफ़ किया करते हैं

कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा,

ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं


कहते है इन्हें डॉक्टर,पुलिसकर्मी

प्रतिदिन ये तिरंगा लहराया करते हैं

अपनी जान भी ये छोटी समझते हैं

हरपल कोरोना ये लड़ाई किया करते हैं


कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा,

ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं


देश की नींव को वो बनाया करते हैं

जिनको लोग भूल जाया करते हैं

ये नींव की ईंटे

शिक्षक कहलाया करते हैं

बिना मान-सम्मान के भी 

ये फ़र्ज़ चुपचाप निभाया करते हैं


कुछ अच्छे नेता ऐसे भी हैं,

देश के लिये वो

अपना लहू बहाया करते हैं

अपने कर्तव्य के ख़ातिर ये लोग

अपने परिवार को छोड़

राष्ट्र धर्म पहले निभाया करते हैं।


कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा,

ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं


कुछ अनजाने चेहरे ऐसे भी है

जो चुपचाप मदद किया करते हैं

उन सभी देश के कोरोना कर्मवीरों को

हम सब देशवासी नमन किया करते हैं

जो काल के मुँह से भी,

लोगो की जिंदगी बचाया करते हैं


कर्तव्य के ख़ातिर ये कर्मवीर सदा,

ही जिंदगी दांव पर लगाया करते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract