STORYMIRROR

Suraj Dixit

Abstract

4  

Suraj Dixit

Abstract

कोन कहता यारो जोकर नहीं रोता है

कोन कहता यारो जोकर नहीं रोता है

1 min
304

दूसरों की खुशियों के लिये 

जो इस राह को चुनता हैं 

जोकर के नाम से जानती है उसे दुनिया

पर ना समझती है की उसमें भी एक दिल होता है


गमों को खुद के छुपाते हुए

झूठी हसी लिए फिरता है

हर पल अपनी कोशीश से 

हर चेहरे में मुस्कान भरता है


जोकर केवल नाम नही है

ये पेशा उसका होता है

जो कभी खुदके लिए नही

सारी दुनिया के लिए जीता है


कितनी वेदनाओं में भी आगे बढता जाता है

कितना उपहास क्यौ ना करती हो दुनिया

फिर भी जवाब मे सिर्फ मुस्कान दे कर जाता है

जोकर होकर भी वो हमसब को 

बिन बोले ही सबक सिखा जाता है


मनोरंजन पूरा हो जाने पर

ये दुनिया ही उसकी कला पे हस्ती है

 क्यौ सोचते नही है हम 

जोकर को भी अपमान की ठेस पोहोचती है

दिल उसको भी है दर्द उसको भी होता है 

कौन कहता है यारो 

जोकर नहीं रोता है ?

कौन कहता है यारो 

जोकर नहीं रोता है ?


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract