कलम ही क्रांति लायेगी
कलम ही क्रांति लायेगी
हमारे घर में देखो वो,
चिराग लेकर आये हैं,
जिन्होंने सैकड़ों घर,
एक पल में जलाये हैं।
मिटा के सबकी हस्ती को,
अपनी हस्ती बनाई है।
हमारे बीच नफ़रत की,
जिन्होंने दीवार उठाई है।
आतंक की आँधी जिन्होंने,
विश्व में फैलाई है।
अब कलम ही है जो,
क्रांति लायेगी,
सोई हुई कौम को,
फिर से जगायेगी।
सुभाष, भगत, अशफ़ाक को,
फिर से बुलायेगी।
तभी विश्व में,
शान्ति आयेगी।
