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Minal Aggarwal

Abstract

4  

Minal Aggarwal

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किसी भी यात्रा के दौरान

किसी भी यात्रा के दौरान

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किसी यात्रा पर निकलो तो 

यह तो हर किसी को पता होता है कि 

वापिस तो घर लौटकर ही आना है लेकिन 

फिर भी यात्रा पर जब तब 

निकलते रहना चाहिए 


घर के एक बंद कमरे में 

एक कोने में ही 

हमेशा पड़े नहीं रहना चाहिए 

घर के कमरे की खिड़की को 

एक ताजी हवा के झोंके के 

अहसास के लिए 


चाहे मौसम हो कितना भी सर्द या 

गर्म पर 

खोलते रहना चाहिए 

यात्रा से तो मन रोमांचित 

होता है 

प्रसन्न होता है 


आनंदित होता है 

दृश्य पल पल बदलते हैं 

नये लोगों का भी जीवन में 

आवागमन होता है 

नये नये संवाद होते हैं 

नये नये अनुभव 


खामोश बैठ जाओ तो भी 

कानों को सुनने को मिलती है 

भीड़ की उथल पुथल 

शोरगुल और 

हलचल 

कहीं कोई हंस रहा होता है 


कहीं कोई रो रहा होता है 

कोई चुपचाप बैठा होता है तो 

कोई जोर जोर से बातें कर रहा होता है 

कोई तरह तरह के पकवान खा रहा 

होता है 


चारों तरफ लजीज भोजन की सुगंध 

फैला रहा होता है 

कोई पानी तो कोई चाय या 

अन्य कोई पेय पदार्थ पी रहा 

होता है या 

अपनी बोतल या थर्मस में भर 

रहा होता है 


कोई अखबार या पत्रिका के 

पन्ने खड़खड़ाते हुए पलट रहा 

होता है तो 

कोई मोबाइल के स्क्रीन पर 

अपनी आंखें गड़ाये बैठा होता है 


यात्रा एक जो सफर है 

वह गतिमान होता है 

बीच बीच में इसमें 

पड़ाव भी आते हैं और 

जीवन को समाहित करते हुए 


एक खट्टा मीठा, 

चटपटा और 

मजेदार सा 

बहुत कम समय में 

एक बहुत बड़ा अनुभव जो 

अंत में यात्री को मंजिल तक भी 

पहुंचाता है 


यात्रा तो एक बहुत ही 

सुखद अनुभूति है 

अलग अलग यात्राओं पर 

समय समय पर 

हर किसी को 

अलग अलग दिशाओं में 


बहुत कुछ मन में जिज्ञासा लिये 

दुनिया भर के अनुभव 

बटोरकर काफी कुछ सीखने के 

लिए 

निकलते रहना चाहिए 


यात्रा एक सुखद अहसास ही 

देगी 

इसमें कभी बोरियत नहीं 

होती 

एक आशा की किरण ही 

लहराती है हर सू 

यह मेरी गारंटी है कि


किसी भी यात्रा के दौरान 

निराशा कभी 

किसी को हाथ नहीं लगेगी।


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