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Rahul Yadav

Tragedy

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Rahul Yadav

Tragedy

किसान

किसान

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जायद के मौसम में वो गर्मी की जंग लडे,

तब जाकर कहीं भरते हैं देश में अनाज के धड़े,

खून पसीने की मेहनत से उपजी फसल पर ,

अपने हक के लिए लड़ता देख उस इंसान को,।          

और अन्त में सीने पर गोली खाता देख धरती के भगवान को ,

देख कर मौत की चिता पर किसान को।

कैसे नींद आ जाती है देश के प्रधान को।।


बंजर सी धरती से सोना उगाकर हर ,                  

व्यक्ति तक निवाला पहुंचाने का मादा रखता देख उस इंसान को,

फिर भी भूखों व बेरोजगारी से मरता देख उसके बेटे नौजवान को,

देख कर मौत की चिता पर किसान को ।

कैसे नींद आ जाती है देश के प्रधान को।।


किसी को चिंता कालेधन की किसी को भ्रष्टाचार की ,

किसी को चिंता वोट बैंक की किसी को सरकार की,

मगर लड़ाई कौन लड़ेगा फसलों के हकदार की ,

हर रोज नये ख्वाबों की बातें करता देख उस इंसान को,

देख कर मौत की चिता पर किसान को।

कैसे नींद आ जाती है देश के प्रधान को।।

     


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