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Mukesh Kumar Sonkar

Tragedy

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Mukesh Kumar Sonkar

Tragedy

किसान मजदूर होते जा रहे

किसान मजदूर होते जा रहे

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दिन ब दिन बदलते जा रहे यहां के परिवेश,

मजदूर होते जा रहे हैं जो कभी चलाते थे देश।

मेहनती किसान ही हमारे देश के हैं भाग्यविधाता,

सारी दुनिया का पेट भरने वाले असली अन्नदाता।

गर्मियों की तेज धूप में भी ये पसीना बहाते हैं,

बारिश की तेज धार हो या आंधी सबसे टकराते हैं।

उनके कड़े अथक परिश्रम से ही धरती फसल है देती,

इनकी मेहनत और लगन से सारी दुनिया पेट भरती।

किसानों की दुर्दशा जानकर भी लोग मोल भाव हैं करते,

कड़े परिश्रम से उपजी फसलें कम में लेकर जेबें भरते।

कभी बाढ़ तो कभी सूखे वाले मौसम की मार से,

कड़ी मेहनत पर कमीशन एजेंटों के अत्याचार से।

बाजारों में बढ़ती मुनाफाखोरी और भ्रष्टाचार से,

इनकी मेहनत की फसलों पर हो रहे कालाबाजार से।

खेती में बढ़ती इन मुश्किलों से किसान हो रहे मजदूर हैं,

दो वक्त की रोजी रोटी कमाने पलायन करने पर मजबूर हैं।।


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