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Pinki Khandelwal

Inspirational

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Pinki Khandelwal

Inspirational

ख्वाबों की महफ़िल

ख्वाबों की महफ़िल

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नित दिन नये नये ख्वाबों को सजाती हूं,

प्यार भरी दुनिया मे नयी आशा को थामे मैं,

अपनी ही मस्ती में मस्त रहती हूं,

नित नयी भोर नयी अभिलाषा को जगाती हूं,

कुछ पल सुकून के कुछ पल उम्मीद लिए,

जीवन की सच्चाई में अपनी कहानी लिखती हूं,

नित दिन नये ख्वाबों को सजाती हूं,

कुछ बनने की चाह कुछ पाने की चाहत में,

हर दिन नयी उम्मीद को बांधे रहती हूं,

सांझ सवेरे एक ही कोशिश में लगी रहती,

कि कब वो दिन आए जिस उम्मीद में बैठी मैं,

हर रोज नयी नयी कहानी को लिखती हूं,

नित दिन मैं नये नये ख्वाबों को फिर से सजाती हूं,

ख्वाबों को मेरे मुझसे कोई छीन न ले,

सपनों की उड़ान को कोई बांध न लें,

खुले आसमां को मेरे कोई चुरा न ले,

बांधी उम्मीद की डोर को कोई तोड़ न दे,

इस कोशिश में सांझ सवेरे में सुध बुध खोए,

उस पल के उस उम्मीद के साए में बिताती हूं,

जिस उम्मीद की डोर को पकड़े,

अपने सपनों को ख्वाबों में मैंने सजाया है।


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