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Manu Sweta

Abstract

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Manu Sweta

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ख्वाब

ख्वाब

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चलो आज सपनो की

नई दुनिया बसाते है

आज हम चांद पर

एक नया घर बनाते हैं


हवा में चलने के लिए

छोटे छोटे पंख लगाते है

हो जाये सब कुछ हरा हरा

थोड़ा सा आसमां में

पेड़ों का रंग मिलाते हैं।


कुछ मीठा खाने का मन हो

बादलो की आइसक्रीम बनाते हैं।

सब कुछ लगे अच्छा अच्छा

आज अच्छाई की चादर फैलाते हैं।


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