STORYMIRROR

Jyoti Kajare

Abstract

3  

Jyoti Kajare

Abstract

ख्वाब

ख्वाब

1 min
277

मैंने ताजमहल सा...

सुंदर सपना ही देखा था..!!

नाहीं वो ताजमहल माँगा..

ख्वाबो में तो मैंने...

चाँद को भी देखा था...!!

ना कि उसे भी माँगा...

बस छोटी सी तो...

ख्वाईश थी मेरी...

उँचाई पर उड़ने की..

इतनी भी ना बढी थी..!!

मुझ में तो बहुत दम था...!

लेकिन जिसका सहारा...

मैंने लिया था...!!

वो बाबू ही कम कुवत था..!!

कि मेरा आगे बढना ही मुश्किल था...!!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract