STORYMIRROR

minni mishra

Abstract

4  

minni mishra

Abstract

खूबसूरती

खूबसूरती

1 min
467

खूबसूरती

कहीं पायल की झंकार में

कभी चूड़ियों की बाजार में

कहीं प्रियतम की अंगड़ाई में

कभी ममता की मनुहार में।


खूबसूरती....

कहीं समर्पण में

कहीं सेवा में

कहीं सादगी के लिबास में

हाँ कभी खामोशी बन

नारी के अनुपम श्रृंगार में ।


खूबसूरती ....

कभी निर्जन में

कहीं एकांत में

दो नयनों की परिभाषा बन

इस अनोखे संसार में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract