Anil Yadav
Action Others
खुशकिस्मत हो साहब अगर आप बोल सकते हो,
जो जज़्बात हैं उन्हें अल्फाजों से खोल सकते हो!
दिया है ज़ुबां खुदा ने तो इस तौफे की हिफाज़त करो,
वरना तुम भी बेजुबान ए-तराजू में तौले जा सकते हो!
उसे चाहने की ...
किसी को चुना ...
तेरी सूरत है
दीदार-ए-इंतज़...
सुकून
मैं तो एक लफ़...
तुम्हें एक बा...
कभी खोना नहीं...
दिलवाले हो गए
ज़रूरी है क्य...
और इस रात से जल्द ही मुक्ति वह दिलाएगी वह सुबह जल्दी ही आएगी ................ और इस रात से जल्द ही मुक्ति वह दिलाएगी वह सुबह जल्दी ही आएगी ..................
भगवान क्यों हो रहा सृष्टि पर ये सब फेर। भगवान क्यों हो रहा सृष्टि पर ये सब फेर।
आशाओं के कुछ बीज जो बोये थे अब अंकुर बनकर फूटने लगे हैं आशाओं के कुछ बीज जो बोये थे अब अंकुर बनकर फूटने लगे हैं
कोई खेत भी क्या सुन सान रहता है ? पंजाब के खेत देखो बोल रहे। कोई खेत भी क्या सुन सान रहता है ? पंजाब के खेत देखो बोल रहे।
हर्षिता लिखती है बेबाक सच हो होगा शर्मसार आज भी नही तो कब होगा। हर्षिता लिखती है बेबाक सच हो होगा शर्मसार आज भी नही तो कब होगा।
पार कर लेंगे हम, आपदा की महानदी को, पार कर लेंगे हम, आपदा की महानदी को,
मुख न मोड़ें कभी निज दायित्वों से, खुश होकर करें सदा इनका निर्वाह। मुख न मोड़ें कभी निज दायित्वों से, खुश होकर करें सदा इनका निर्वाह।
ज्वार-भाटा सा सुख-दुख है होता, बिल्कुल ही हम मानें न डर। ज्वार-भाटा सा सुख-दुख है होता, बिल्कुल ही हम मानें न डर।
तू हमें क्या डराएगा, अब तो तू ही भाग जाएगा। तू हमें क्या डराएगा, अब तो तू ही भाग जाएगा।
मैं पूछता हूँ मेरी गली में वो आए क्यों जिस डाकिए के पास तेरी चिट्ठियाँ न हों। मैं पूछता हूँ मेरी गली में वो आए क्यों जिस डाकिए के पास तेरी चिट्ठियाँ न हों।
कहीं खूबसूरत और खुशहाल है जिंदगी, कहीं सड़कों पर बेबस बेहाल है जिंदगी l कहीं खूबसूरत और खुशहाल है जिंदगी, कहीं सड़कों पर बेबस बेहाल है जिंदगी l
लगन सच्ची है रास्ते भी खुल जायेंगे हमें अपने परिवार के लिए जीना है l लगन सच्ची है रास्ते भी खुल जायेंगे हमें अपने परिवार के लिए जीना है l
जब जलेगा अग्नि कुंड में फिर निखरेगा कुंदन बनकर। जब जलेगा अग्नि कुंड में फिर निखरेगा कुंदन बनकर।
कल किसने देखा है यहाँ कब मैं गिरा कब जग गिरा।। कल किसने देखा है यहाँ कब मैं गिरा कब जग गिरा।।
कड़ी धूप में काम कर, जग को देती छाँव। कड़ी धूप में काम कर, जग को देती छाँव।
नहीं तो इंसान अब तक, ख़ुद ही ख़ुदा बन जाता ! नहीं तो इंसान अब तक, ख़ुद ही ख़ुदा बन जाता !
क्या होगा अब तो समय चला गया, अब फिर क्यों लौट कर आए हैं। क्या होगा अब तो समय चला गया, अब फिर क्यों लौट कर आए हैं।
इस महामारी से जान बचानी है तो सुरक्षा कवच वैक्सीन जरूरी है l इस महामारी से जान बचानी है तो सुरक्षा कवच वैक्सीन जरूरी है l
सनातन संस्कृति तो है भारत भूमि की पूजती प्रकृति के हर रूप को जैसे देव। सनातन संस्कृति तो है भारत भूमि की पूजती प्रकृति के हर रूप को जैसे देव।
हर जीव स्थल का यहाँ तू ही सहारा, यहाँ इस जहां में तू ही तू बसेरा, हर जीव स्थल का यहाँ तू ही सहारा, यहाँ इस जहां में तू ही तू बसेरा,