Anil Yadav
Action Others
खुशकिस्मत हो साहब अगर आप बोल सकते हो,
जो जज़्बात हैं उन्हें अल्फाजों से खोल सकते हो!
दिया है ज़ुबां खुदा ने तो इस तौफे की हिफाज़त करो,
वरना तुम भी बेजुबान ए-तराजू में तौले जा सकते हो!
उसे चाहने की ...
किसी को चुना ...
तेरी सूरत है
दीदार-ए-इंतज़...
सुकून
मैं तो एक लफ़...
तुम्हें एक बा...
कभी खोना नहीं...
दिलवाले हो गए
ज़रूरी है क्य...
ऊपर नभ में मनोरम बादलों की छटा नीचे तरंगिणी जल तरंगित होता हुआ। ऊपर नभ में मनोरम बादलों की छटा नीचे तरंगिणी जल तरंगित होता हुआ।
खुशियों के पल कर्तव्य निभाते हुए ही चुराने होंगे। खुशियों के पल कर्तव्य निभाते हुए ही चुराने होंगे।
ये ठीक है कि विज्ञान जब तक करता है रक्षण ! ये ठीक है कि विज्ञान जब तक करता है रक्षण !
कानों में पड़े हैं बड़े बड़े कुण्डल माथे पर है पंडित जी जैसा तिलक। कानों में पड़े हैं बड़े बड़े कुण्डल माथे पर है पंडित जी जैसा तिलक।
कभी हम पत्नी हैं कभी हम प्रियतमा है कभी तुम्हारे बच्चों की मां है तुम्हारी मां की बहु कभी हम पत्नी हैं कभी हम प्रियतमा है कभी तुम्हारे बच्चों की मां है तुम्हारी मां क...
एक दिन बुलंद होगा तेरे भाग्य का सितारा जिंदगी जो मिली है फिर न मिलेगी दोबारा एक दिन बुलंद होगा तेरे भाग्य का सितारा जिंदगी जो मिली है फिर न मिलेगी दोबारा
अपने-पराये सभी अकेला ग़म के साथ छोड़ गए। अपने-पराये सभी अकेला ग़म के साथ छोड़ गए।
पशु-प्राणी-जन जग में पाते, सब प्रकाश की गरिमा है।। पशु-प्राणी-जन जग में पाते, सब प्रकाश की गरिमा है।।
प्यार को परसतिश कहने वालों, क्या बताओगे तुम। प्यार को परसतिश कहने वालों, क्या बताओगे तुम।
नीर तुम्हारी है अमृत, करते सब ही पान। नीर तुम्हारी है अमृत, करते सब ही पान।
जिस वजह से मुझे कभी तुम थी मिली। जिस वजह से मुझे कभी तुम थी मिली।
उसकी हँसी सदा चाहे हो बेटा या बेटी, दोनों को स्वस्थ प्रसन्न देखकर है सुखी। उसकी हँसी सदा चाहे हो बेटा या बेटी, दोनों को स्वस्थ प्रसन्न देखकर है सुखी।
आईने में भी खुद के आगे कैसे मुंह दिखाओगे। आईने में भी खुद के आगे कैसे मुंह दिखाओगे।
क़ानून से वर्जित है फिर भी लाचारी से बेबस घुटन है। क़ानून से वर्जित है फिर भी लाचारी से बेबस घुटन है।
क्योंकि उस हालत में आप अपना असली पहचान ही खो चुके होंगे क्योंकि उस हालत में आप अपना असली पहचान ही खो चुके होंगे
पूर्ण भूमंडल के जन-जन, हेतु आध्यात्मिक त्राण लिए। पूर्ण भूमंडल के जन-जन, हेतु आध्यात्मिक त्राण लिए।
जैसे दो पहलवान आपस में भिड़ते हैं जैसे दो पहलवान आपस में भिड़ते हैं
जीवन में ऐसे लोग किसी को बहुत कम भी मिले। जीवन में ऐसे लोग किसी को बहुत कम भी मिले।
तब समाज को सकारात्मक संशोधन का संकल्प लेना पड़ता है तब समाज को सकारात्मक संशोधन का संकल्प लेना पड़ता है
चांदनी में तेरा हुस्न है परियों सा। दिल करे तुझे चाहूं सुबह से शाम चांदनी में तेरा हुस्न है परियों सा। दिल करे तुझे चाहूं सुबह से शाम