खुशियों को रौशन करते रहिए
खुशियों को रौशन करते रहिए
दीपों को जलाकर खुशियों को रौशन करते रहिए,
दूर रहकर भी दिल से अपनों के करीब आते रहिए।
किसी का दिल न जलाएँ पर दीये तो जलाते रहिए,
रौशनी का ठंग बदलकर किसी का दीया बनकर जलते रहिए।
गर रब ने हमें दीया है तो कुछ नेक काम भी करते रहिए,
जो महरूम हैं दीयों से उनके घर में भी ख़ुशियाँ भरते रहिए।
ख़ुश रहिए व तरक़्क़ी की राहों पर चलते रहिए,
ग़मों को भुलाकर हर वक़्त बस मुस्कुराते रहिए।
यूँ तो ज़िन्दगी है ग़मों से अक्सर भरी हुई,
लेकिन चुनौतियों का डटकर मुकाबला करते रहिए।
ख़ुद ख़ुश रहिए व माँ-बाप को भी ख़ुश रखते रहिए,
कुछ इस तरह ही हर रोज़ मिलकर दीवाली मनाते रहिए।
