खुदगर्ज़ी
खुदगर्ज़ी
ज़िंदा तो हूँ, पर जीने की वजह नहीं हैं।
दर्द में हूँ, पर दर्द का एहसास नहीं हैं।
हँसता भी हूँ, पर खुशी नहीं हैं।
ज़िन्दगी में अपनों का साथ भी नहीं हैं।
फिर भी मुझे एकेलापन महसूस नहीं होता हैं।
क्योंकि अब मैंने खुदगर्ज़ी सिख लिया हैं।
