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Anjana Singh (Anju)

Abstract

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Anjana Singh (Anju)

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खोती इंसानियत

खोती इंसानियत

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आज इंसान ना रहा इंसान 

वो तो इंसानियत खो बैठा है

कोई काम ना आता एक दूसरें के

एक दूसरें का दुश्मन बन बैठा है


अपने अहंकार के सामने

उसें तो कुछ दिखता नहीं

दूसरों से पहले रखता आस

चाहे खुद में कोई काबिलियत नहीं


जहाॅं देखों इंसान हैं बिकता

मज़हब और ईमान भी बिकता

कहीं पर सम्मान न दिखता

हर दिल में नफरत ही पलता


कहॉं अपनापन का रिश्ता दिखता

शायद ही कोई फरिश्ता दिखता

भरें पड़े हैं चोर-लुटेरें

हर तरफ एक-दूसरें को घेरें


नारियों को ना मिलती इज्जत

और ना बड़े-बुजुर्गों को सम्मान

शर्म करों ऐ खुदा के बन्दों

कुछ तों बन जाओं इंसान


दूसरों को रूलानें हेतू

जी तोड़ परिश्रम हैं करतें

अपनी जीत की फ़िक्र नहीं

अपितु दूसरें के हार के लिए 


अथक परिश्रम करतें हैं

लोग जुदा हैं खुद के वजूद से

खुद से ज्यादा दूसरों में

व्यस्त रहा करतें हैं


खुद को समझों 

खुद को बदलों 

एक दिन ये जिंदगी 


काश हो जाएगी

कल का इंतजार ना करों तुम

आज की कीमत समझों तुम

वरना आस ही आस रह जायेगी।


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