खो दिया
खो दिया
कभी ख़ामोशी का भी एक किरदार था
उसका रुतबा ऐसा
किसी को भी आत्म मंथन कराता...
आज ख़ामोशी भी ख़ामोश है
जब हम बाहरी दिखावे के लिए शोर कर रहे हैं
आज ख़ामोशी नाराज बैठा है...
ख़ामोशी ने दोस्ती हमसे निभाया
हमने ही नहीं समझा
और सच्चे दोस्त ख़ामोशी को खो दिया!
