STORYMIRROR

Sobhit Thakre

Abstract Classics Inspirational

4  

Sobhit Thakre

Abstract Classics Inspirational

खिलौने

खिलौने

1 min
95

मिट्टी से बने हम सब 

ईश्वर के हाथों से बने खिलौने ही तो है 

फिर कैसा रूठना 

फिर कैसा टूटना


रहो सदा मुस्कुराते

अपनों संग खुशियां मनाते

जो छोड़ चले अपने हमको 

उनकी स्मृतियों को यादों में संजोते


एक दिन हमको भी जाना 

नश्वर जग में किसका ठिकाना

फिर कैसी खींचातानी

बोलो सबको मधुर वाणी

धन दौलत नहीं काम आएगी


मानवता ही नाम कमाएगी

छोड़ सारे कुकर्मों को 

नाता जोड़े सत्कर्मो से 

क्योंकि 

मिट्टी से बने हम सब 

ईश्वर के हाथों से बने खिलौने ही तो है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract