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Durga Thakre

Children Stories Children

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Durga Thakre

Children Stories Children

टीचर जी

टीचर जी

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छोटी -छोटी बातों पर

टीचर जी तुम डाँटो ना ।

बेवजह गुस्से में भर

हमारी बातों को काटो ना ।

थोड़ी सी तो हम बच्चे करते शैतानी

आपको क्यों होती इतनी हैरानी ।

कुछ बात हमारी भी

अब तो शांत हो सुनो ना ।

सीखेंगे हम बच्चे धीरे -धीरे

कुछ नए आयाम आप चुनो ना ।

किताबी कीट बनकर ही

सारे बच्चे सीखते हैं क्या ?

रटे किताबें हम ऐसे ही

कोई पढ़ाई भला होती क्या ?

गुट्टे ,लिट्टे ,कंकड़ खेले

खेले हम तो छुपन छुपाई ।

नाटक में हमारे बनते राजा -रानी

तो कोई बनते हैं चोर सिपाही ।

चित्रों की दुनिया हमको अति प्यारी

मित्रमंडली हमारी हैं सबसे न्यारी ।

अभी अभी सीखा हमने डायरी लिखना

अपने मन की बातों को पन्नों पर गढ़ना ।

आप हमें कभी सैर कराओ

कहानियों के संसार की ।

घुलती जिनमें कल्पनाएं नई

होती रोगी के उपचार सी ।

जब हँसते -गाते सीखे हम

तो आपके सिर का बोझ होवे कम ।



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