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Dr Baman Chandra Dixit

Abstract

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Dr Baman Chandra Dixit

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ख़ुद को समझा लिया

ख़ुद को समझा लिया

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आज फ़िर मैने खुद को समझा लिया।

नासमझ न समझते खुद को समझा लिया।।


कुत्ते की डूम है जो, टेढ़ी को टेढ़ी रहेगी,

हो न सकती सीधी खुद को समझा लिया।।


परोसा खीर शुकर को खोजा वो मल लेकिं,

शुकर रहेगा शुकर ही खुद को समझा लिया।।


दिया था इज्जत बहुत बेइज्जत करते हैं जो

क़ाबिल नहीं है ज़ाहिल ख़ुद को समझा लिया।।


जूती को मत बैठा ,सर पे फिर से कभी

पैर के क़ाबिल है वो खुद को समझा लिया।।


काटती है कभी कभी जूती भी पैरो को,

खीझ है क्षण भर का ख़ुद को समझा लिया।।


क़ीमत से अकड़ते जो कीमती होते नहीं,

किस्मत से क़ीमत उसका खुद को समझा लिया।।


आंखें मूंद लो बामन धूल के आंधी है ये,

टिकता नहीं बहुत देर ख़ुद को समझा लिया।।



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