STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

खेल

खेल

1 min
353

जा तो रहे हो तुम पर किधर जाओगे 

हमें इस तरह छोड़कर 

अकेले क्या रह पाओगे ? 


आंखों के काजल में देखो 

मेरे नाम का कलर मिलेगा 

मांग के सिंदूर, बिंदिया में 

मेरी उल्फत का असर मिलेगा 


लबों पर मेरे नाम की मिठास है 

गालों पर उलझन की खटास है 

मुस्कुराओगी तो मैं याद आऊंगा 

सीने में मेरे दबे दबे अहसास हैं 


रिश्तों की पायल बंधी है पैरों में 

सिमटी सी रहोगी वहां गैरों में 

कंगन मेरे गीत जब गुनगुनाएगा 

मेरी यादों से बचाने कौन आयेगा ? 


एक पल भी ना रह पाओगी बिन मेरे 

काटे नहीं कट पायेंगे अब दिन तेरे 

मैं ही तेरी दुनिया हूं अब सनम 

हम दोनों का साथ रहेगा हर जनम 


यह खेल खतरनाक है, मत खेलो 

बैठे ठाले गमों का बोझ मत झेलो 

हम तुम एक टीम के खिलाड़ी हैं 

प्यार के खेल मे दोनों ही अनाड़ी हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance