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ritesh deo

Abstract

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ritesh deo

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खालीपन

खालीपन

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दुनिया भर की दौड़ धूप में खालीपन भी एक वरदान है,

खालीपन में आत्मसात से खुद की खुद से पहचान है।


खालीपन में ही व्यक्ति आत्म मंथन का मौका पाता है,

खालीपन में ही व्यक्ति आत्म चिंतन का मौका पाता है।


आत्म मंथन एवं आत्म चिंतन से खुद को ही पढ़ता है,

स्वयं के अध्ययन से व्यक्ति विकास पथ पर बढ़ता है।


जो व्यक्ति सर्वदा व्यस्त धनोपार्जन में ही लगा रहता है,

औरों के हित पैदा करता खुद के साथ ही दगा करता है।


मानव जीवन अगर मिला तो खुद के लिए भी जीना है,

दौड़ धूप में बीमारी पालीं फिर मरण तुल्य ही जीना है।


औरों के हित क्यों खून खफायें हरेक स्वयं कमायेगा,

हर एक का अपना जीवन जो जैसा बैसा बन जायेगा।


भावी पीढ़ियों के भी जो स्वयं ठेकेदार बन जाते हैं,

आने वाली संतानों को अकर्मंडय स्वयं बना जाते हैं।


खालीपन के समय देशाटन और मस्ती ही करनी है,

जिस समाज से हम आते अब उसकी सेवा करनी है।


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