*कद्र *
*कद्र *
अपने शब्दों का स्तर इतना ऊंचा रखिये,
किसी के अंतर्मन को ना चोट पहुंच पाए।
शब्दों से लगे घाव, अंदर बहुत गहरे होते हैं,
किसी के आंसुओ की वजह मत बनिए ।
सच्चे संबंध बहुत मुश्किल से मिलते हैं,
रूह को हिला दे ऐसे निशान मत रखिए।
अहंकार से किसी की हैसियत मत नापो,
विनम्रता का शुद्ध सागर हृदय में बहाइए।
इस जमाने में भी कोई थोड़ी वफ़ा कर दे,
तो उस वफ़ा को ताउम्र दिल से निभाइए ।
कदर करने वाले लोग ज़िन्दगी में मिले जो,
ऐसे रिश्ते को बेवजह ऐसे मत ठुकराईए ।
