STORYMIRROR

Shivam Rao

Abstract

3  

Shivam Rao

Abstract

कभी खुशी कभी गम

कभी खुशी कभी गम

1 min
468

कभी ख़ुशी कभी गम के चक्कर में

मैं आया था हाँ मैं एक दिन रोते रोते


मुस्कुरा था समय ऐसा आया था

की हॉस्टल में घर की याद का


टाइम आया था और मम्मी का

आया यूँ तो रो रहा था मैं


लेकिन बचपन के किस्से सुन

मुस्काते मुस्कराते अपने आप को


ना रुक पाया था उस दिन दिल

खोल के हँस पाया था।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract