STORYMIRROR

Mukesh Bissa

Abstract

3  

Mukesh Bissa

Abstract

कभी कभी

कभी कभी

1 min
233

सोचा है हमने कभी कभी

देखा है हमने कभी कभी।

गुम हो जाता है ये

मेरा वक्त भी कभी कभी।

मंजिल की ओर जाते हुए

मिलती राह नई कभी कभी।

हर पल बिखरता हुआ

एक हो जाता हैं कभी कभी।

गमों की परछाइयों में 

मिल जाती है खुशी कभी कभी।

रहबर की आस में

मिलता है दिलबर कभी कभी

फूलों संग खेलने पर

चुभते है कांटे कभी कभी।

सुबह का भुला हुआ कोई

आ जाता है इस दर पे कभी कभी।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract