STORYMIRROR

Manoj Kumar

Romance Thriller

4  

Manoj Kumar

Romance Thriller

कैसी ये हयात हैं

कैसी ये हयात हैं

1 min
309

जिसे पाने के लिए तड़पा

तनहाई में मजबूर हुआ !

उससे दूर हुआ !

थाम लेता हूं आंसू अपने

बस देखता हूं उसके ही सपने

मैंने उसपल की जुदाई,

क्यूं रोक नहीं पाई...


बस उलझन ही रहता पल- पल

ख़्वाब को समझता हूं दर्पण..

उसका ही चेहरा दिखाई पड़ता हैं।


कब वो अपना कहेगी !

मेरे सम्मुख आएगी !

मुझसे बातें करेगी !


कुछ सोचकर मेरा दिल रो पड़ता..

वो क्यूं अलग हुई मुझसे

मैं उसके इन्तजार में हूं कबसे 

इतना भी ज़िक्र नहीं...

मेरे लिए...


मैं उसके लिए सब कुछ किया

अपना दिल तोड़कर बिखेर दिया

कैसी ये हयात....!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance