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Kumar Ritu Raj

Abstract

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Kumar Ritu Raj

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कैसे कह दूं

कैसे कह दूं

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कैसे कह दूं

मैं, कैसे कह दूं

कैसे कह दूं मैं कायर नहीं,

जब गलत करने से डरता हूं

कैसे कह दूं मैं शायर नहीं,

जब शब्दों को दिलों से रचता हूं

कैसे कह दूं

मैं, कैसे कह दूं

कैसे कह दूं मैं बलवान नहीं,

जब हर आफ़त से जी भर लड़ता हूं

कैसे कह दूं मैं इन्सान नहीं,

जब हर शब्दों पर मंथन करता हूं

कैसे कह दूं

मैं, कैसे कह दूं

कैसे कह दूं मैं घायल नहीं,

जब दर्द के बाद भी लबों पे मुस्कान रखता हूं

कैसे कह दूं मैं लायक नहीं,

जब अब भी कई के दिल में बसता हूं

कैसे कह दूं

मैं, कैसे कह दूं!


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