काश वो लम्हे फिर लौट आये
काश वो लम्हे फिर लौट आये
काश वो लम्हे फिर लौट आये,
जब एक रूठे और दूसरा मनाये,
एक दूसरे को देखना भर,
होठों पर मुस्कान ले आए,
काश वो लम्हे फिर लौट आये।
आँखों से गिरते आँसू भी,
दिल में हल्का सुकुन भर जाए,
जब मैं थकूँ उससे पहले,
तेरा कन्धा सहारा दे जाए।
बिना किसी बात के हम,
बेफिक्र घंटों बातें करते जाएं,
काश वो लम्हे फिर लौट आये।
आज हालत कुछ अलग है,
सब कुछ है वही
फिर भी कुछ तो गलत है,
कोई नहीं है अब जो
मेरी तकलीफ जान पाए,
काश ! वो लम्हे फिर लौट आये !
बहुत बार गुम हो जाती हूँ मैं,
टूट कर बिखर जाती हूँ मैं,
पर वो हाथ नहीं जो मुझे संभाल पाए,
काश ! मेरी वो दौलत मुझे फिर मिल जाए,
काश ! वो लम्हे फिर लौट आये।
