जय हो छत्तीसगढ़ महतारी
जय हो छत्तीसगढ़ महतारी
"जय हो छत्तीसगढ़ महतारी"
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ महतारी,
महिमा तोर हवे बड़ भारी।
धन्य हे मोर जन्म के पावन भुइया,
धन्य हे इहाँ के माटी प्यारी।
तोर जस गावत मन नई अघाए,
फेर बखान करहूँ मैं ओसरी-पारी।
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ महतारी.....
कहलाथस् धान के कटोरा, अन्न के हवे भंडार,
हरियर तोर खेत लगें मनभावन अपार।
भोरमदेव के मंदिर कहो चाहे सिरपुर के धाम,
गूँजथे चारों दिसा सुग्घर संस्कृति के नाम।
महानदी के निर्मल जलधारा,
सँवारत हे तोर रूप न्यारा।
बस्तर के जंगल, चित्रकूट झरना के धारी,
इहाँ के सुग्घर रूप देख, चकित हे जम्मो संसारी।
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ महतारी.....
पंथी, राउत नाचा, सुआ के रंग,
लोककला में बसत हे माटी के ढंग।
वीर सपूत मनके पावन बलिदान,
जेकर गाथा बढ़ावत तोर सम्मान।
जियत भर हाँसके तोर गुण गावव,
आखरी बेरा तोर माटी म मिल जावव।
जीयत मरत तोर चरणन शीश नवावव,
जय हो मोर छत्तीसगढ़ महतारी,
जय हो जय हो छत्तीसगढ़ महतारी.....
धन्य हे हमर छत्तीसगढ़ महतारी अऊ इहाँ के रहईया,
चारों मुड़ा के मनखे मा सबले बढ़िया कहाथे छत्तीसगढ़िया।
स्वरचित एवं मौलिक रचना.....
✍️ मुकेश कुमार सोनकर,
"सोनकरजी"
भाठागांव, रायपुर, छत्तीसगढ़
