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Mukesh Kumar Sonkar

Abstract Classics Inspirational

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Mukesh Kumar Sonkar

Abstract Classics Inspirational

स्वतंत्रता की अमर

स्वतंत्रता की अमर

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              "स्वतंत्रता की अमर गाथा"

गली गली में गूँज रही आज, वीरों की बलिदानी गान,

भारत माँ के चरणों में,किए अर्पित जीवन, अर्पित प्राण।

लहू से जिसने लिख डाली, आज़ादी की अमर कहानी,

उन वीर सपूतों को नमन, जिनसे गौरवमयी हुई जवानी।


फाँसी के फंदे पर झूल गए, हँसते-हँसते जो वीर जवान,

देश की खातिर त्याग दिया, अपना सुख और अपना मान।

भगत, सुखदेव, राजगुरु ने, जग में कीर्ति अमर कर दी,

सुभाष की हुंकार ने फिर, सोई चेतना जागृत कर दी। 


झाँसी की रानी ने रण में, शौर्य की मिसाल दिखाई,

वीर शिवाजी की गाथा ने, स्वाभिमान की ज्योति जलाई।

गाँधी जी के सत्य-अहिंसा ने, जन-जन में विश्वास जगाया,

लौह पुरुष के दृढ़ संकल्प ने, बिखरे भारत को एक बनाया।


कितने ही अनजाने चेहरे, इतिहास में खो गए कहीं,

पर उनकी कुर्बानी की खुशबू, मिट सकती है कभी नहीं।

उनके सपनों का भारत हम, मिलकर आज बनाएँगे,

जाति-धर्म की दीवारें तोड़, एकता का दीप जलाएँगे।


तिरंगा केवल ध्वज नहीं है, यह भारत की शान है,

केसरिया त्याग की पहचान, सफेद सत्य का मान है।

हरा रंग समृद्धि का संदेश, चक्र कर्म की राह दिखाए,

हर भारतीय के दिल में यह, राष्ट्रप्रेम की ज्योति जलाए।


आओ आज शपथ ये लें हम, देश सदा सर्वोपरि होगा,

भारत माँ के गौरव से बढ़कर, कुछ भी नहीं हमारा होगा।

वीरों की उस अमर गाथा को, पीढ़ी-दर-पीढ़ी गाएँगे,

स्वतंत्र भारत की पावन धरती, मिलकर और सजाएँगे।

✍️मुकेश कुमार सोनकर, रायपुर छत्तीसगढ़ 


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