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RAJESH KUMAR

Inspirational

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RAJESH KUMAR

Inspirational

जुबान

जुबान

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उच्चारण हो गड़बड़

है, सब को अखरता

हो बच्चों का,है चलता

बिल्कुल नहीं अखरता।


जुबान भी क्या चीज़

आकार छोटा पतला

हड्डी नही ,केवल मांस

है सब में बहुत ख़ास!


इनपुट है आंख, नाक

कान ,चमड़ी, दिमाग

आउटपुट है ,जुबान

कम्प्यूटर को दे मात।


कुछ नहीं ,है सबकुछ है

लेकिन चुप रहकर देखो

काम तो चल सकता है

बस हम मशीन नही है।


क्या से क्या ना करा दे?

बिगड़ते को ओर बिगाड़ दे

गिरे को ओर गिरा दे,जुबान

हीन को दीनहीन बना दे।


धनवान को बना दे महान

अशिक्षत तो दे विद्या ज्ञान

ललकारे तो, सीना फुला दे

सौम्यता का प्रसार करा दे।


दुश्मन को दोस्त, बना ले

अपने बिगड़े ,काम बना ले

बुरा वक्त हो ,जुबान संभाले

वक्त हो बलिष्ठ, धार लगाले।


चाक़ू छुरी से बहुत आगे

मिनटों में सब खाक करा दे

शायर कवि नेता अभिनेता

करते खूब करते उपयोग।


स्वाद बेस्वाद तीखा मीठा

भोजन का, एहसाह करा दे

जिह्वा ना हो ,बस भरता पेट

अंतर,खाने का एहसास करा दे।


प्राण जाय ,वचन ना जाए

इतिहास भगवान राम बना दे

अब भी कुछ है ,खुद्दार!

है दुनिया का दारमदार।


माना, अब समय बदला है

स्वार्थ के लिय कुछ भी

पर ऐसे ,कब तक चलेगा

सब हो पाबंद ,वचनबद्ध।


सब पर भरोसा,जो हों झूठे

दिखना होगा,समझना होगा

तभी अपना घर संसार

हो सकता है, रामराज।


हो सकता है ,हो भी जायेगा

ये बात है बस विश्वास की

बस अभ्यास ,ईमानदारी की

प्रयास है करना, परिवर्तन होगा।


जुबान व वचन है ,अनमोल

वही रह जाएंगे ,इसका मोल 

बनाकर है रखना, करना होगा

जुबान को साधना होगा,सब होगा।


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