STORYMIRROR

Yogeshwar Dayal Mathur

Inspirational

4  

Yogeshwar Dayal Mathur

Inspirational

ज़मीर

ज़मीर

1 min
248

ज़मीर हमारा आईना है

बेजुबान है पर कमजोर नहीं 

याद-दाश्त में गहरा है 

ये नुक्स कभी ना भूला है

सारी ग़लत हरकतों का 

इसके पास पूरा ब्योरा है


सीरत का असली अक्स है ये

सारी खताओं का बक्सा है

हर गलत कदम पर इसने टोका था

हमने ही अपने को नहीं रोका था

इससे रूबरू हो जाओ अगर

फितरत संवारने की कसम खा लेना

शायद दिल को कुछ सकूँ मिल जाए

 

जितने बह-के कदम उठाए थे

सजा से अब तक बच पाए थे

गुमान इसपर हरगिज़ मत करिए-गा

जो भी सज़ा का हक़दार बना


ज़मीर के इंसाफ से नहीं बचा 

यह खेरख्वाह है इंसानियत का

जहीन सलाहियत तस्लीम करें

दिल से इसका एहतराम करें।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational