जल
जल
बादल तो बरसते हैं
फिर हम क्यों तरसते हैं
कहां जाता है पानी, क्यों होती है बेईमानी
विकास तुम्हारा ठीक है
फिर क्यों पानी के लिए भीख है
हरे भरे जंगल क्यों काटे
धरती टुकड़ों टुकड़ों में क्यों बांटे
कहां गए सब पोखर, तालाब
नदियों का क्यों तोड़ रुआब
क्यों नहीं किया संचित पानी
गर्मी में करते हो पानी पानी
प्रकृति से करते रहोगे खिलवाड़
पानी का होता रहेगा अकाल
आओ बचाएं जल, खोजे सुनहरा कल।
