Nitu Mathur
Tragedy
हर गहरे जख्म का मरहम भी तेज असर करता है
मेरे दिल का हर कोना तेरी दवा से ही सांसे भरता है
दौड़ता है रंगों में लहू भी इस क़दर डर डर कर मेरी
की जैसे हर मील पर ये बख्शी जान का कर्ज़ भरता है।
मौसम की जोड़ ...
नई सी धुंध
नव उद्देश्य
नई नादानियाँ
धुआँ
परिधान
कौन याद रखता ...
जीवंतता
कीमत सिंदूर क...
मैं अपने रंग ...
इंसा हो इंसा ही बने रहो, नियति तूने सबक सिखाया। इंसा हो इंसा ही बने रहो, नियति तूने सबक सिखाया।
जिसे प्रेम कहूँ या चाहत- सोचो कैसे उर क्या नाम दूं तेरा। जिसे प्रेम कहूँ या चाहत- सोचो कैसे उर क्या नाम दूं तेरा।
अपने हालात का और फ़िर कभी देखा भी नहीं पलट कर अपने हालात का और फ़िर कभी देखा भी नहीं पलट कर
मैं हूं नदी, कहूं आत्मकथा भ्राता। मैं हूं नदी, कहूं आत्मकथा भ्राता।
लगकर गले चल रही हैं ऐसे मानों अपना ही घर समझा है मुझे। लगकर गले चल रही हैं ऐसे मानों अपना ही घर समझा है मुझे।
प्रलयंकारी रूप धरूँगी, बनूँगी तेरा काल। प्रलयंकारी रूप धरूँगी, बनूँगी तेरा काल।
जहाँ हम बसायें धवल चाँदनी में सपन क्यों हमें ये सजाना न आया। जहाँ हम बसायें धवल चाँदनी में सपन क्यों हमें ये सजाना न आया।
पता नहीं क्यों अब मगर, होने लगा है अचानक तन्हाई का सा एहसास ! पता नहीं क्यों अब मगर, होने लगा है अचानक तन्हाई का सा एहसास !
क्योंकि बूढ़ा बैल कहीं बिकता नहीं इसमें भला किसान का क्या दोष ? क्योंकि बूढ़ा बैल कहीं बिकता नहीं इसमें भला किसान का क्या दोष ?
भाई को ही अपने भाई से अब होने लगा है द्वेष भाई को ही अपने भाई से अब होने लगा है द्वेष
लोग क्यों परदेस बसते, एक रोटी के लिए। लोग क्यों परदेस बसते, एक रोटी के लिए।
कम अक्ल बिगड़ी शक्ल, व्यायाम का, देश निकाला। कम अक्ल बिगड़ी शक्ल, व्यायाम का, देश निकाला।
क्या इसीलिए ? बीच राह छोड़ गए क्यों बिना कुछ कहे ? क्या इसीलिए ? बीच राह छोड़ गए क्यों बिना कुछ कहे ?
अपने मन की इच्छाओं को हमेशा दबाती रही कुछ इस तरह औरत जीती रही। अपने मन की इच्छाओं को हमेशा दबाती रही कुछ इस तरह औरत जीती रही।
सोचो अब तो हुक्मरानों दिल्ली दहलाने वाली है। सोचो अब तो हुक्मरानों दिल्ली दहलाने वाली है।
मैं नदी हूँ तुम्हारी माँ जैसी हूँ सब कुछ सह चुप रहती हूँ। मैं नदी हूँ तुम्हारी माँ जैसी हूँ सब कुछ सह चुप रहती हूँ।
अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर। अगर अभी भी न समझे तो मनुष्य का अस्तित्व रह जाएगा हिलकर।
सहेजा अपने अंतर्मन तक कागजी दुनिया में सहेजा नहीं। सहेजा अपने अंतर्मन तक कागजी दुनिया में सहेजा नहीं।
दूध की खाली बोतल दिखा दिखा कर कहीं दुत्कारी जाती दूध की खाली बोतल दिखा दिखा कर कहीं दुत्कारी जाती
हाट में -बाज़ार में लोगों की भीड़ में गन्दी और फटा कपड़ा पहन कर टहलते देखा हूँ। हाट में -बाज़ार में लोगों की भीड़ में गन्दी और फटा कपड़ा पहन कर टहलते ...