STORYMIRROR

Nitu Mathur

Tragedy

2  

Nitu Mathur

Tragedy

जख्म

जख्म

1 min
164

हर गहरे जख्म का मरहम भी तेज असर करता है

मेरे दिल का हर कोना तेरी दवा से ही सांसे भरता है

दौड़ता है रंगों में लहू भी इस क़दर डर डर कर मेरी

की जैसे हर मील पर ये बख्शी जान का कर्ज़ भरता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy