Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Shilpi Srivastava

Romance


3  

Shilpi Srivastava

Romance


जज़्बात

जज़्बात

1 min 1 1 min 1

अपने जज़्बातों से यूँ,

इस कदर हारे हैं हम,

अपनी ही बातों पे डिगकर,

रह नहीं पाते कभी,


फैसला लेते हैं तुमको,

मुड़के ना देखेंगे अब,

पर तुम्हें देखे बिना भी,

रह नहीं पाते कभी,


तेरी वो ख़ामोश बातें,

हैं हमें चुभती हमेशा, 

तुम मेरी खुलकर कही भी, 

सुन नहीं पाते कभी।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shilpi Srivastava

Similar hindi poem from Romance