जिन्दगी
जिन्दगी
जिंदगी इस अर्थ में जंग नहीं है,
कि यह अपने आप में जंग है !
बल्कि जिंदगी इस अर्थ में जंग है
कि जिंदगी हमें अपने वजूद का एहसास कराती है ।
तमाम उतार-चढ़ाव को पार करते हुए,
आशा -निराशा के मिश्रित भाव
हर्ष -विषाद चोट और घाव ,
सब सहते हुए हमें जीने का सलीका सिखाती है ।
जिंदगी इस अर्थ में जंग है कि
इस जंग के नायक भी हम हैं खलनायक भी हम ही हैं।
जिंदगी के जंग को हिंसा -प्रतिहिंसा ,लोभ- स्वार्थ , शत्रुता द्वारा से कभी जीती नहीं जा सकती !
इस खूबसूरत जंग को जीतने के लिए प्रेम ,अहिंसा सद्भावना और भाईचारे कि पग -पग पर जरूरत महसूस होती है।
और यह ज़ंग कभी खत्म नहीं होने वाली,
क्योंकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस जंग का अनुसरण करती है !
क्योंकि जिंदगी का जंग शाश्वत -सतत- सनातन है।
