ज़िंदगी को गले लगाया जाए
ज़िंदगी को गले लगाया जाए
सोज़ को साज़ में ढ़ालकर संगीत बनाया जाए
एक बार फिर से ज़िंदगी को गले लगाया जाए
मुरादें पूरी हो जाएगी हर दिल की मेहनत से
ख़ुशियाँ ढूँढती आ ही जाएगी पता क़िस्मत से
दिल के हरेक ख़्वाब को हक़ीक़त बनाया जाए
एक बार फिर से ज़िंदगी को गले लगाया जाए
है भरोसा गर ख़ुदपर तो कुछ भी मुश्किल नहीं
हौसले के दमपर सब मुमकिन हो जाता वहीं
बदला है जमाना नई सोच को अपनाया जाए
एक बार फिर से ज़िंदगी को गले लगाया जाए
तड़प रही हैं आज भी कितनी मासूम कलियाँ
बढ़ रही हैं बेख़ौफ़-सी चारोंओर अंधेर गलियाँ
बेटियों को बेटा समझकर काबिल बनाया जाए
एक बार फिर से ज़िंदगी को गले लगाया जाए।
