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SURYAKANT MAJALKAR

Abstract

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SURYAKANT MAJALKAR

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जिन्दगी की तलाश

जिन्दगी की तलाश

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जिन्दगी की तलाश में

दूर तक निकल आया हूं,

कुछ छोड़ आया हूं,

कुछ जोड़ आया हूं,

जो अपना था खो गया,

जो पराया था संग लाया,

कुछ गिले शिकवे न थे,

कोई ज्यादा करीब थे,

फिर भी राह चल रहा हूं,

जिंदगी पुछता फिरता हूँ।



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