Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.
Click here for New Arrivals! Titles you should read this August.

SURYAKANT MAJALKAR

Abstract


3  

SURYAKANT MAJALKAR

Abstract


जिन्दगी की तलाश

जिन्दगी की तलाश

1 min 121 1 min 121

जिन्दगी की तलाश में

दूर तक निकल आया हूं,

कुछ छोड़ आया हूं,

कुछ जोड़ आया हूं,

जो अपना था खो गया,

जो पराया था संग लाया,

कुछ गिले शिकवे न थे,

कोई ज्यादा करीब थे,

फिर भी राह चल रहा हूं,

जिंदगी पुछता फिरता हूँ।



Rate this content
Log in

More hindi poem from SURYAKANT MAJALKAR

Similar hindi poem from Abstract