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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

जिंदगी की राह

जिंदगी की राह

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अपनी जिंदगी की राह मैं खुद बनाऊंगा

लोगो क़े तानों को ही मैं प्ररेणा बनाऊंगा

जितना यह ज़माना मुझको तड़पायेगा,

उतना ही अपने को मैं कुंदन बनाऊंगा


भरोसा करूंगा में तो अब बस ख़ुद पर,

विश्वास करूंगा अब खुद के कदमों पर,

मंजिल के लिये लगातार चलता जाऊंगा

अपनी जिंदगी की राह में खुद बनाऊंगा


तीक्ष्ण बेदर्द शूलों के चुभन की कसम,

दिल के ज़ख्मो को बनाएंगे हम मल्हम,

इस कदर करेंगे हम तो मेहनत साखी,

पत्थरों पे कर्मरस्सी से निशां करेंगे हम


जुनूँ भरूँगा खुद में,में शोलों के जैसा,

ज़माने को बता दूंगा,में नही ऐसा वैसा,

अपने रास्ते बताने,खुद आईने बनाऊंगा

अपनी तस्वीर खुद की खुद से सजाऊंगा


चलूंगा सफ़र में,लक्ष्य पे इस तरह की

एक रोज खुद ही मंजिल बन जाऊंगा

ज़माने की अफ़वाहों से नही घबराउंगा

ख़ुद की ख़ुदी के गीत में अब गाऊंगा


अपने इरादों में,में वो जान डाल दूँगा

एकरोज में इस फ़लक को झुकाउंगा

क्या जग की रुसवासियां रस्ता रोकेगी?

हंसते हुए आया,हंसते हुए ही जाऊंगा।



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