जिंदगी की कहानी
जिंदगी की कहानी
कविता लिखना
पहले मेरी चाहत थी
फिर वह मेरी आदत बन गई
एक मीठा नशा जैसे मुझमें छा गई
बाद में वह जीने के लिए
मेरा मजबूरी बन गई
पर ये कब हुआ ,कैसे हुआ
सच है यार
मुझे ये कुछ पता न चला
अब तो हाल है ऐसा
एक भी दिन यार
जी न सकेंगें हम उसकी बिन
ठीक ऐसी ही हमारे जिंदगी
पहले प्यार ,फिर आदत
बाद में मजबूरी
यही तो जिंदगी की कहानी है
तेरे मेरे सबके .........
फर्क सिर्फ इतना कि
कोई ये दर्द भरे दास्तान को
बोल देता है
कोई रहता चुप
पी लेता है वो
अपनी सारे आसूं को मुस्कुराते हुए।
