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PRATAP CHAUHAN

Abstract Tragedy

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PRATAP CHAUHAN

Abstract Tragedy

जिंदगी जल रही है

जिंदगी जल रही है

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जहाँ सिगरेट सिगार का धुआं उठ रहा है,

वहाँ ज़िन्दगी का आने वाला कल जल रहा है|

ये जो चारों तरफ जहरीली हवा चल रही है,

उस हवा से उक्त जिंदगी बेवजह जल रही है|


यह कैसा मजा आ रहा है मद मस्ती का,

जो निशान मिटा रहा है किसी हस्ती का|


जन हानि हो रही है परिवार में,

जहाँ बच्चा बच्चा बिलख रहा है |

खरीदते हैं वो ये कैसा मजा है,

जहाँ सुकून अब सिसक रहा है|


ये धूम्रपान की जो जहरीली हवा चल रही है,

देखो, आने वाली कोई जिंदगी जल रही है|


जहाँ कमाने वाला बेवक्त गुजर गया है,

वहाँ बच्चों के सिर से साया उठ गया है|


समझा रहा हूँ अपनी इस कलम से,

दगा मत करो तुम जिंदगी के सनम से,

मिलती है जिंदगी लाखों पावन कर्म से|


जिन्हें सींचते हो पावन धर्म से,

चलो आज से एक वादा करें|

खुशहाल परिवार को सुरक्षित रखें ♡


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