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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy Inspirational

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Tragedy Inspirational

जिम्मेदारी

जिम्मेदारी

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सबको बस अपने अधिकारों की पड़ी है 

जिम्मेदारी गुमसुम सी एक कोने में खड़ी है 

अधिकारों के लिए आसमां सिर पे उठा रखा है 

जिम्मेदारी से सबने अपना पल्ला झाड़ रखा है 

"निरंकुश अधिकार" "जिम्मेदारी" को चिढा रहा है 

सार्वजनिक मखौल उड़ाकर परेशानियां बढा रहा है 

पर जिम्मेदारी समझदार है ओछी हरकत नहीं करती 

लगन, मेहनत, समर्पण भाव से चुपचाप लगी रहती 

बिना थके, बिना रुके, बिना डरे मंजिल की ओर बढती 

दुख, दर्द, ताने, फब्तियां, अपमान सब कुछ है सहती 

जिम्मेदारी का अपना एक भरा पूरा परिवार है 

जिम्मेदारी के साथ रहने वालों का सुखी संसार है 



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