जीवन तकली का ताना बाना है
जीवन तकली का ताना बाना है
अपनी मर्ज़ी नहीं रब की मर्ज़ी से चलते जाना है,
ये जीवन सुख दुःख की तकली का ताना बाना है !
लिखा हुआ सबका खूबसूरत सा सफरनामा है,
बताओ आसान कहाँ इसे शब्दों में लिख पाना है !
कभी यहाँ तो छितराई सुनहरी सी धवल धूप है,
तो कभी अमावस की स्याह सी घनी छाई रैना है !
सुख दुःख का जीवन में बराबर आना जाना है,
कुछ होता अनुभव नया तो कुछ हुआ पुराना है !
बस में न किसी के अपना भविष्य को देख पाना है,
तभी तो कह गए संत कबीर, रहना नहीं देस बिराना है !
